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<title>وبلاگ تخصصی مهندسی نفت دانشگاه مرودشت</title>
<link>http://petroleum2008.blogfa.com/</link>
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<lastBuildDate>Mon, 10 Aug 2009 09:09:14 GMT</lastBuildDate>
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<title>مواد امتحاني و ضريب دروس  آزمون كارشناسي ارشد مهندسی نفت سال 1389 تغییر کرد</title>
<link>http://petroleum2008.blogfa.com/post-55.aspx</link>
<description>&lt;P dir=rtl&gt;اطلاعیه مهم&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;مواد امتحاني و ضريب دروس  آزمون كارشناسي ارشد مهندسی نفت سال 1389 تغییر کرد&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;رشته‌هاي مهندسي شيمي گرايش مخازن هيدروكربوري (كد 1258) و مهندسي نفت با گرايش‌هاي 1- مهندسي حفاري و بهره‌برداري نفت 2- مهندسي اكتشاف نفت (كد 1253)، با يكديگر ادغام شده و مجموعه مهندسي نفت با گرايش‌هاي مندرج در جدول ذيل را پديد مي‌آورد.&lt;/P&gt;
&lt;DIV dir=rtl align=center&gt;
&lt;TABLE dir=ltr borderColor=#bd9ec6 cellSpacing=0 cellPadding=3 align=center border=1&gt;
&lt;TBODY&gt;
&lt;TR&gt;
&lt;TD vAlign=top width=58&gt;&lt;BR&gt;&lt;STRONG&gt;رشته&lt;/STRONG&gt; &lt;/TD&gt;
&lt;TD vAlign=top width=96&gt;
&lt;P dir=rtl align=center&gt;&lt;STRONG&gt;گرايش‌ها&lt;/STRONG&gt;&lt;/P&gt;&lt;/TD&gt;
&lt;TD width=108&gt;
&lt;P dir=rtl align=center&gt;&lt;STRONG&gt;ملاحظات&lt;/STRONG&gt;&lt;/P&gt;&lt;/TD&gt;
&lt;TD vAlign=top width=276&gt;
&lt;P dir=rtl align=center&gt;&lt;STRONG&gt;مواد امتحاني&lt;/STRONG&gt;&lt;/P&gt;&lt;/TD&gt;
&lt;TD width=53&gt;
&lt;P dir=rtl align=center&gt;&lt;STRONG&gt;ضرايب&lt;/STRONG&gt;&lt;STRONG&gt; &lt;/STRONG&gt;&lt;/P&gt;&lt;/TD&gt;&lt;/TR&gt;
&lt;TR&gt;
&lt;TD width=58 rowSpan=15&gt;
&lt;P dir=rtl align=center&gt;مجموعه مهندسي نفت (كد 1253)&lt;/P&gt;&lt;/TD&gt;
&lt;TD width=96 rowSpan=15&gt;
&lt;P dir=rtl align=center&gt;1- اكتشافات نفت&lt;BR&gt;2- مهندسي حفاري و بهره‌برداري نفت&lt;BR&gt;3- مهندسي مخازن هيدروكربوري&lt;/P&gt;&lt;/TD&gt;
&lt;TD width=108 rowSpan=3&gt;
&lt;P dir=rtl align=center&gt;* دروس مشترك&lt;BR&gt;گرايش‌ها&lt;/P&gt;&lt;/TD&gt;
&lt;TD vAlign=top width=276&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;1- زبان عمومي و تخصصي&lt;/P&gt;&lt;/TD&gt;
&lt;TD width=53&gt;
&lt;P dir=rtl align=center&gt;2&lt;/P&gt;&lt;/TD&gt;&lt;/TR&gt;
&lt;TR&gt;
&lt;TD vAlign=top width=276&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;2- رياضي (رياضي عمومي 1 و 2، معادلات ديفرانسيل، رياضي مهندسي)&lt;/P&gt;&lt;/TD&gt;
&lt;TD width=53&gt;
&lt;P dir=rtl align=center&gt;2&lt;/P&gt;&lt;/TD&gt;&lt;/TR&gt;
&lt;TR&gt;
&lt;TD vAlign=top width=276&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;3- دروس زمين‌شناسي (زمين‌شناسي عمومي ـ زمين‌شناسي ساختماني ـ زمين‌شناسي نفت)&lt;/P&gt;&lt;/TD&gt;
&lt;TD width=53&gt;
&lt;P dir=rtl align=center&gt;2&lt;/P&gt;&lt;/TD&gt;&lt;/TR&gt;
&lt;TR&gt;
&lt;TD width=108 rowSpan=4&gt;
&lt;P dir=rtl align=center&gt;1- دروس‌تخصصي&lt;BR&gt;گرايش اكتشاف نفت &lt;/P&gt;&lt;/TD&gt;
&lt;TD vAlign=top width=276&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;4- ژئوفيزيك و ژئوشيمي آلي&lt;/P&gt;&lt;/TD&gt;
&lt;TD width=53&gt;
&lt;P dir=rtl align=center&gt;3&lt;/P&gt;&lt;/TD&gt;&lt;/TR&gt;
&lt;TR&gt;
&lt;TD vAlign=top width=276&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;5- پتروفيزيك و چاه‌نگاري&lt;/P&gt;&lt;/TD&gt;
&lt;TD width=53&gt;
&lt;P dir=rtl align=center&gt;3&lt;/P&gt;&lt;/TD&gt;&lt;/TR&gt;
&lt;TR&gt;
&lt;TD vAlign=top width=276&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;6- دروس مهندسي نفت (مخزن، حفاري، بهره‌برداري)&lt;/P&gt;&lt;/TD&gt;
&lt;TD width=53&gt;
&lt;P dir=rtl align=center&gt;3&lt;/P&gt;&lt;/TD&gt;&lt;/TR&gt;
&lt;TR&gt;
&lt;TD vAlign=top width=276&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;7- زمين‌شناسي تخصصي (زمين‌شناسي تحت‌الارضي، سنگ‌شناسي رسوبي، زمين‌شناسي نفت ايران)&lt;/P&gt;&lt;/TD&gt;
&lt;TD width=53&gt;
&lt;P dir=rtl align=center&gt;3&lt;/P&gt;&lt;/TD&gt;&lt;/TR&gt;
&lt;TR&gt;
&lt;TD width=108 rowSpan=4&gt;
&lt;P dir=rtl align=center&gt;2-‌دروس تخصصي&lt;BR&gt;گرايش‌مهندسي حفاري و بهره‌برداري نفت&lt;/P&gt;&lt;/TD&gt;
&lt;TD vAlign=top width=276&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;8- خواص سنگ و خواص سيال&lt;/P&gt;&lt;/TD&gt;
&lt;TD width=53&gt;
&lt;P dir=rtl align=center&gt;3&lt;/P&gt;&lt;/TD&gt;&lt;/TR&gt;
&lt;TR&gt;
&lt;TD vAlign=top width=276&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;9- چاه آزمائي و نمودارگيري از چاه&lt;/P&gt;&lt;/TD&gt;
&lt;TD width=53&gt;
&lt;P dir=rtl align=center&gt;3&lt;/P&gt;&lt;/TD&gt;&lt;/TR&gt;
&lt;TR&gt;
&lt;TD vAlign=top width=276&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;10 مهندسي حفاري (مهندسي حفاري 1 و 2، سيمان حفاري و گل حفاري)&lt;/P&gt;&lt;/TD&gt;
&lt;TD width=53&gt;
&lt;P dir=rtl align=center&gt;3&lt;/P&gt;&lt;/TD&gt;&lt;/TR&gt;
&lt;TR&gt;
&lt;TD vAlign=top width=276&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;11- مهندسي مخزن و بهره‌برداري (مخزن، بهره‌برداري، مكانيك سيالات دوفازي)&lt;/P&gt;&lt;/TD&gt;
&lt;TD width=53&gt;
&lt;P dir=rtl align=center&gt;3&lt;/P&gt;&lt;/TD&gt;&lt;/TR&gt;
&lt;TR&gt;
&lt;TD width=108 rowSpan=4&gt;
&lt;P dir=rtl align=center&gt;3- دروس تخصصي گرايش مهندسي مخازن هيدروكربوري&lt;/P&gt;&lt;/TD&gt;
&lt;TD vAlign=top width=276&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;12- خواص سنگ و خواص سيال&lt;/P&gt;&lt;/TD&gt;
&lt;TD width=53&gt;
&lt;P dir=rtl align=center&gt;3&lt;/P&gt;&lt;/TD&gt;&lt;/TR&gt;
&lt;TR&gt;
&lt;TD vAlign=top width=276&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;13- چاه آزمائي و نمودارگيري از چاه&lt;/P&gt;&lt;/TD&gt;
&lt;TD width=53&gt;
&lt;P dir=rtl align=center&gt;3&lt;/P&gt;&lt;/TD&gt;&lt;/TR&gt;
&lt;TR&gt;
&lt;TD vAlign=top width=276&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;14- مهندسي مخزن (مخزن 1 و 2)&lt;/P&gt;&lt;/TD&gt;
&lt;TD width=53&gt;
&lt;P dir=rtl align=center&gt;3&lt;/P&gt;&lt;/TD&gt;&lt;/TR&gt;
&lt;TR&gt;
&lt;TD vAlign=top width=276&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;15- مباني حفاري و بهره‌برداري (مباني حفاري، بهره‌برداري، مكانيك سيالات دوفازي)&lt;/P&gt;&lt;/TD&gt;
&lt;TD width=53&gt;
&lt;P dir=rtl align=center&gt;3&lt;/P&gt;&lt;/TD&gt;&lt;/TR&gt;&lt;/TBODY&gt;&lt;/TABLE&gt;&lt;/DIV&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;* بدين ترتيب سه درس اول براي كليه گرايش‌هاي مجموعه مهندسي نفت، بطور يكسان و بصورت مشترك خواهد بود.&lt;/P&gt;</description>
<pubDate>Mon, 10 Aug 2009 09:09:14 GMT</pubDate>
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<dc:creator>petroleum2008</dc:creator>
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</item>
<item>
<title>روش هاي استخراج نفت</title>
<link>http://petroleum2008.blogfa.com/post-54.aspx</link>
<description>&lt;P class=postbody dir=rtl style=&quot;MARGIN: 0cm 0cm 0pt; DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: right&quot;&gt;&lt;STRONG&gt;&lt;SPAN lang=FA style=&quot;FONT-SIZE: 9pt; COLOR: black; FONT-FAMILY: Tahoma&quot;&gt;پس از عمليات حفر چاه و اصابت آن به مخزن نفت، به دليل فشار زياد موجود در مخزن، جريان نفت به سوي دهانه خروجي چاه سرازير مي شود. اين مرحله از استخراج كه عامل آن فشار داخل خود مخزن است به &lt;I&gt;بازيافت اوليه&lt;/I&gt; نفت موسوم است. در برداشت اوليه نفت ، از انرژي خود مخزن براي توليد نفت استفاده مي شود.البته اين بدان معنا نيست كه اگر نفت خود به خود به سطح زمين نيايد، برداشت اوليه وجود نخواهد داشت،بلكه وقتي از پمپ براي بالا آوردن نفت استفاده ميكنيم،در واقع هنوز در مرحله اول برداشت نفـــــــت قرار داريم.در اين مرحله انرژي خاصي وارد مخزن نمي شود.با افزايش توليد و كاهش فشار، سرعت توليد نيز كاهش مي يابد تا اينكه فشار به حدي ميرسد كه ديگر نفت خارج نمي شود. در اين مرحله ممكن است ار 30 تا 50 درصد كل نفت مخزن استخراج شود. علاوه بر فشار مخزن عوامل ديگري منند خواص سنگ مخزن و ميزان تخلخل آنها و همچنين دماي مخازن نيز در ميزان توليد مؤثرند&lt;/SPAN&gt;&lt;/STRONG&gt;&lt;SPAN lang=FA style=&quot;FONT-SIZE: 9pt; FONT-FAMILY: Tahoma&quot;&gt;&lt;A href=&quot;http://www.irche.com/mineral.asp&quot;&gt;&lt;STRONG&gt;&lt;SPAN style=&quot;COLOR: black; FONT-FAMILY: Tahoma&quot;&gt;.&lt;/SPAN&gt;&lt;/STRONG&gt;&lt;/A&gt;&lt;BR&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;</description>
<pubDate>Mon, 23 Mar 2009 21:30:18 GMT</pubDate>
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<item>
<title>تكميل چاه</title>
<link>http://petroleum2008.blogfa.com/post-53.aspx</link>
<description>&lt;DIV class=postbody&gt;&lt;FONT face=Verdana size=4&gt;از زماني كه براي چاههاي نفت حفاري شده و به مرحله توليد رسيد , صنعت گران اين فن بر اثر تجربه و گذر زمان , به تدريج دريافتند كه پاره اي از مشكلات پس از توليدي شدن چاه بوجود مي آيند . لذا در راستاي حل اين مشكلات اقدام به كارهايي نمودند. يكي از اين راه كارها استفاده از رشته لوله هاي استخراج يا توليد بود .&lt;BR&gt;چرا كه نفت يا گاز توليدي به دليل وجود عناصر همراه مانند هيدروژن و كلر موجود و غيره در اثر مجاورت با آب و دماي لازم درون چاه منجر به يك سري و اكنش هاي شيميايي مي شدند كه به مرور سبس خورده شدن ( زنگ زدگي) لوله هاي مغزي بوجود آمد , اقدام به انجام يك سري آزمايش هاي لازم و نهايت كامل كردن يك چاه قبل از رسيدن به مرحله توليد نفت يا گاز شد . اين مراحل امروزه زير عنوان ((آزمايش و تكميل چاه)) مطرح و بررسي مي شود.&lt;BR&gt;اين بخش را مي توان بخش مهندسي اداره چاه پيمايي و تكميل چاه معرفي كرد.&lt;BR&gt;وظايف اداره چاه پيمايي و تكميل چاه در اين قسمت &lt;BR&gt;شامل : خريد وسايل رشته تكميل و وسايل جانبي آن , كار شناسي - برنامه ريزي , آزمايش فشار و روش راندن خارج سازي وسايل رشته تكميل در چاههاي مختلف مي باشد &lt;BR&gt;رشته تكميل در چاههاي - حومه شهري (Urban Well)&lt;/FONT&gt;&lt;/DIV&gt;</description>
<pubDate>Wed, 18 Mar 2009 19:53:18 GMT</pubDate>
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</item>
<item>
<title>ازدیاد برداشت از مخازن نفتی به روش میکروبی </title>
<link>http://petroleum2008.blogfa.com/post-52.aspx</link>
<description>&lt;P dir=rtl style=&quot;DIRECTION: rtl; LINE-HEIGHT: 13.5pt; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: right&quot;&gt;&lt;SPAN lang=AR-SA&gt;یکی از کاربردهای بیوتکنولوژی، استفاده از ریزسازواره­ها (میکروارگانیزم‌ها) در صنایع نفتی می‌باشد. این کاربرد, با توجه به گستردگی صنعت نفت در کشور ما بایستی مورد توجه خاص قرار گیرد. مطلب زیر از طرف خانم اعظم لقمانی برای شبکه ارسال شده است که در پروژة کارشناسی ارشد خود (در دانشگاه صنعتی امیرکبیر), بر روی ازدیاد برداشت از مخازن نفتی با استفاده از ریزسازواره‌ها، تحقیقاتی آزمایشگاهی داشته و در این رابطه مقالاتی نیز در ششمین کنفرانس ملی مهندسی شیمی و دومین همایش ملی بیوتکنولوژی ایران ارائه کرده است.&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl style=&quot;DIRECTION: rtl; LINE-HEIGHT: 13.5pt; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: right&quot;&gt;&lt;SPAN lang=AR-SA&gt;استفاده از میکروب‌ها در ازدیاد برداشت نفت بحث جدیدی نیست. اولین مورد مکتوب، در سال &lt;/SPAN&gt;&lt;SPAN lang=FA&gt;۱۹۱۳&lt;/SPAN&gt;&lt;SPAN lang=AR-SA&gt; مربوط به ج.ب.دیویس (&lt;/SPAN&gt;&lt;SPAN dir=ltr&gt;J.B.Davis&lt;/SPAN&gt;&lt;SPAN lang=AR-SA&gt;) است. در سال &lt;/SPAN&gt;&lt;SPAN lang=FA&gt;۱۹۴۶&lt;/SPAN&gt;&lt;SPAN lang=AR-SA&gt;، سی.ای.زوبل (&lt;/SPAN&gt;&lt;SPAN dir=ltr&gt;c.a.zobell&lt;/SPAN&gt;&lt;SPAN lang=AR-SA&gt;) فرایندی برای بازیافت ثانویه نفت با استفاده از میکروب‌های بی‌هوازی و مکانیزم انحلال مواد معدنی سولفاتی ثبت کرد.&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl style=&quot;DIRECTION: rtl; LINE-HEIGHT: 13.5pt; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: right&quot;&gt;&lt;SPAN lang=AR-SA&gt;اولین آزمایش میدانی ازدیاد برداشت نفت به‌روش میکروبی (&lt;/SPAN&gt;&lt;SPAN dir=ltr&gt;MEOR&lt;/SPAN&gt;&lt;SPAN lang=AR-SA&gt;)، در سال &lt;/SPAN&gt;&lt;SPAN lang=FA&gt;۱۹۵۴&lt;/SPAN&gt;&lt;SPAN lang=AR-SA&gt; در یکی از میادین نفتی آرکانزاس انجام گرفت. اما با وجود موفق بودن، به‌دلیل در دسترس بودن منابع نفتی ارزان‌قیمت، این شیوه‌ها کنار گذاشته شدند. در دهة &lt;/SPAN&gt;&lt;SPAN lang=FA&gt;۱۹۷۰&lt;/SPAN&gt;&lt;SPAN lang=AR-SA&gt; مجدداً به‌دلیل ناپایداری قیمت نفت و گرایش به بیوتکنولوژی، این شیوه‌ها مورد توجه قرار گرفتند. از &lt;/SPAN&gt;&lt;SPAN lang=FA&gt;۱۹۸۰&lt;/SPAN&gt;&lt;SPAN lang=AR-SA&gt; به بعد به‌دلیل افزایش قیمت نفت در کشورهای گوناگون، این روش‌ها کم و بیش متداول شدند و به‌نظر می‌رسد که در آینده تنها شیوة افزایش برداشت عملی باشند. مخازن مناسب برای &lt;/SPAN&gt;&lt;SPAN dir=ltr&gt;MEOR&lt;/SPAN&gt;&lt;SPAN lang=AR-SA&gt; باید واجد شرایط زیر باشند:&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl style=&quot;DIRECTION: rtl; LINE-HEIGHT: 13.5pt; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: right&quot;&gt;&lt;SPAN lang=AR-SA&gt;دما کمتر از &lt;/SPAN&gt;&lt;SPAN dir=ltr&gt;C ˚&lt;/SPAN&gt;&lt;SPAN lang=FA&gt;۷۵&lt;/SPAN&gt;&lt;SPAN lang=AR-SA&gt;، شوری تا ، &lt;/SPAN&gt;&lt;SPAN dir=ltr&gt;pH &lt;/SPAN&gt;&lt;SPAN lang=FA&gt;۱۰۰۰۰&lt;/SPAN&gt;&lt;SPAN lang=AR-SA&gt;این &lt;/SPAN&gt;&lt;SPAN lang=FA&gt;۴&lt;/SPAN&gt;&lt;SPAN lang=AR-SA&gt; تا &lt;/SPAN&gt;&lt;SPAN lang=FA&gt;۹&lt;/SPAN&gt;&lt;SPAN lang=AR-SA&gt; ، تراوایی بیش از &lt;/SPAN&gt;&lt;SPAN lang=FA&gt;۷۵&lt;/SPAN&gt;&lt;SPAN dir=ltr&gt;mD&lt;/SPAN&gt;&lt;SPAN lang=AR-SA&gt; ، سنگینی نفت بر اساس &lt;/SPAN&gt;&lt;SPAN dir=ltr&gt;API&lt;/SPAN&gt;&lt;SPAN lang=AR-SA&gt; بیش از &lt;/SPAN&gt;&lt;SPAN lang=FA&gt;۱۸&lt;/SPAN&gt;&lt;SPAN lang=AR-SA&gt;، فشار تا &lt;/SPAN&gt;&lt;SPAN lang=FA&gt;۱۲۰۰۰&lt;/SPAN&gt;&lt;SPAN dir=ltr&gt;atm&lt;/SPAN&gt;&lt;SPAN lang=AR-SA&gt; و عمق کمتر از &lt;/SPAN&gt;&lt;SPAN dir=ltr&gt;m3500&lt;/SPAN&gt;&lt;SPAN lang=AR-SA&gt;. در این میان بیشترین تاثیر مربوط به دما و &lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;</description>
<pubDate>Tue, 17 Mar 2009 07:56:18 GMT</pubDate>
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<dc:creator>petroleum2008</dc:creator>
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<title>بکارگيري ليزرهاي پرتوان در عمليات مشبک کاري چاه هاي نفت با توجه به شرايط مخازن ايران</title>
<link>http://petroleum2008.blogfa.com/post-51.aspx</link>
<description>مقدمه&lt;BR&gt;مشبک کاري در صنعت نفت و گاز عبارتست از ايجاد تونلي در ديواره چاه براي جريان يافتن سيال مخزن از ميان لوله جداري سيمان شده به درون چاه. مشبک کاري از مهمترين و حساسترين بخش هاي تکميل چاه مي باشد. مشبک کاري ناقص و نامناسب علاوه بر آسيب به سازند، هزينه هاي مشبک کاري مجدد و يا اسيد کاري را به دنبال خواهد داشت.&lt;BR&gt;در روش هاي معمول مشبک کاري نظيرJet Perforation وBallistic Perforation علاوه بر مشکلات ايمني، کنترل اندازه و عمق سوراخ ايجاد شده نيز دشوار بوده و باعث آسيب سازند مي شود.&lt;BR&gt;تحقيقات انجام گرفته براي يافتن روش هاي جايگزين مشبک کاري نشان داده است که ليزر به خوبي توانايي برش و مشبک کاري سنگ ها را دارد. ضمن آنکه به دليل انتقال حرارت فراوان براي سوراخ کردن سنگ، تراوايي و تخلخل سنگ نيز افزايش پيدا مي کند.&lt;BR&gt;هر دو نوع سنگ مورد آزمايش يعني Lime Stone وSand Stone را مي توان به گونه اي با ليزر مشبک کاري نمود. در مشبک کاري  با ليزر اشعه ليزر با نمونه سنگ برخورد کرده و انرژي ليزر به سنگ انتقال مي يابد. اين انرژي باعث افزايش دما در نمونه سنگ مي شود تا آنجا که خاصيت سيمان شدگي بين </description>
<pubDate>Tue, 17 Mar 2009 07:54:18 GMT</pubDate>
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<dc:creator>petroleum2008</dc:creator>
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</item>
<item>
<title>مشبـك كـردن لايـه توليـدي چـاه</title>
<link>http://petroleum2008.blogfa.com/post-50.aspx</link>
<description>&lt;P dir=rtl style=&quot;DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: right&quot;&gt;&lt;FONT color=#ff0000&gt;&lt;STRONG&gt;&lt;SPAN dir=ltr style=&quot;FONT-FAMILY: Tahoma&quot;&gt;Perforation&lt;/SPAN&gt;&lt;/STRONG&gt;&lt;STRONG&gt;&lt;SPAN lang=AR-SA style=&quot;FONT-FAMILY: Tahoma&quot;&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/STRONG&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl style=&quot;DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: right&quot;&gt;&lt;SPAN lang=FA style=&quot;FONT-SIZE: 14pt&quot;&gt;&lt;/SPAN&gt; &lt;SPAN lang=AR-SA style=&quot;FONT-SIZE: 11pt; FONT-FAMILY: Tahoma&quot;&gt;قسمت عمده تكميل يك چاه مشبك كردن لايه توليدي آن مي باشد. اين عمل كلاً بدان معني است كه ارتباط بين لايه توليد كننده و داخل چاه را برقرار مي نمايند و در حقيقت با سوراخ كردن جداره پوششي چاه عمل صورت مي پذيرد&lt;SPAN&gt;  &lt;/SPAN&gt;.&lt;SPAN&gt;  &lt;/SPAN&gt;انجام اين امر پس از مطالعه كامل سنگ مخزن و مشخص كردن محل لايه توليدي صورت مي گيرد و در انجام آن بايستي دقت زياد به كار برد بخصوص از نظر عمق زيرا كه در صورت اشتباه و يا نقص در عمل مشكلات عديده اي بروز خواهد كرد .&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl style=&quot;DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: right&quot;&gt;&lt;SPAN lang=AR-SA style=&quot;FONT-SIZE: 11pt; FONT-FAMILY: Tahoma&quot;&gt;امروزه به دو صورت جداره پوششي را مشبك مي نمايند. يكي توسط گلوله هاي بخصوصي كه با روش مخصوصي به طرف ديواره فلزي چاه در عمق مورد نظر پرتاب مي گردد و ديگري بوسيله شهاب فلزي كه بوسيله باروت بوجود مي آيد .&lt;SPAN&gt;  &lt;/SPAN&gt;در حقيقت مي توان گفت طرز عمل هر دو تقريباً مشابه است و فقط نوع گلوله ها متفاوت مي باشد (بديهي است زماني كه لايه توليدي بودن پوشش فلزي تكميل مي گردد &lt;/SPAN&gt;&lt;SPAN dir=ltr style=&quot;FONT-SIZE: 11pt; FONT-FAMILY: Tahoma&quot;&gt;(open&lt;SPAN&gt;  &lt;/SPAN&gt;hole) &lt;/SPAN&gt;&lt;SPAN lang=AR-SA style=&quot;FONT-SIZE: 11pt; FONT-FAMILY: Tahoma&quot;&gt;&lt;SPAN&gt; &lt;/SPAN&gt;ديگر عمل مشبك كردن لازم نيست .)&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl style=&quot;DIRECTION: rtl; unicode-bidi: embed; TEXT-ALIGN: right&quot;&gt;&lt;SPAN lang=AR-SA style=&quot;FONT-SIZE: 11pt; FONT-FAMILY: Tahoma&quot;&gt;&lt;/SPAN&gt; &lt;/P&gt;</description>
<pubDate>Tue, 17 Mar 2009 07:45:18 GMT</pubDate>
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<dc:creator>petroleum2008</dc:creator>
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</item>
<item>
<title>فایل pdf روش های ازدیاد برداشت-مهندس نبی پور</title>
<link>http://petroleum2008.blogfa.com/post-47.aspx</link>
<description>جهت دانلود به  لینک زیر بروید سپس گزینه free user  را بزنید  و کمی صبر کنید بعد گزینه download را بزنید.(فایل ها فشرده است جهت باز کردن آنها از unzipاستفاده کنید.)
&lt;P&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;A href=&quot;http://rapidshare.com/files/205246712/EOR.pdf.html&quot;&gt;http://rapidshare.com/files/205246712/EOR.pdf.html&lt;/A&gt;&lt;/P&gt;</description>
<pubDate>Wed, 04 Mar 2009 15:43:18 GMT</pubDate>
<comments>http://commenting.blogfa.com/?blogid=petroleum2008&amp;postid=47</comments>
<dc:creator>petroleum2008</dc:creator>
<guid>http://petroleum2008.blogfa.com/post-47.aspx</guid>
</item>
<item>
<title>آشنایی با نرم افزارOil Manager (توصيف و محاسبه خواص نفت خام و برشهاي نفتي)</title>
<link>http://petroleum2008.blogfa.com/post-46.aspx</link>
<description>&lt;P dir=rtl style=&quot;MARGIN-TOP: 0px; MARGIN-BOTTOM: 0px&quot; align=justify&gt;&lt;SPAN style=&quot;FONT-SIZE: 9pt&quot;&gt;براي توصيف نفت خام و برش هاي نفتي كه مخلوط هاي بسيار پيچيده اي هستند روش ها و روابط فراواني وجود دارد. OilManager يكي از اجزاي اختياري HYSYS است كه كار توصيف و سرشت نمايي (Characterization) اين مخلوط ها را انجام مي دهد. روشي كه اين برنامه براي تبديل داده هاي آزمايشگاهي (assay) به گروهي از سازنده هاي مجازي به كار مي برد از مراحل فرعي سرشت نمايي زير تشكيل شده است &lt;A href=&quot;http://blog.irche.com/&quot;&gt;: &lt;/A&gt;&lt;BR&gt;&lt;BR&gt;برمبناي منحني سنجش ورودي، OilManager مجموعه اي از منحني هاي كاري شامل دماي TBP ، وزن مولكولي، دانسيته و ويسكوزيته را در محدوده كامل (%100-0) محاسبه مي كند. &lt;BR&gt;نكته : اگر داده هاي تقطير موجود نباشد، دو مورد از سه خاصيت كلي مخلوط (وزن مولكولي، دانسيته و ضريب (Watson(UOP)K كافي است تا OilManager منحني تقطير TBP را تخمين بزند. &lt;BR&gt;&lt;BR&gt;با استفاده از نقاط قطع برش پيش فرض يا آنچه توسط كاربر داده شده است هر جزء مجازي مخلوط از منحني TBP محاسبه مي شود. &lt;BR&gt;&lt;BR&gt;&lt;/SPAN&gt;&lt;/P&gt;</description>
<pubDate>Wed, 25 Feb 2009 05:43:18 GMT</pubDate>
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<title>جداسازي تركيبات نفتي از آب به روش مغناطيسي</title>
<link>http://petroleum2008.blogfa.com/post-45.aspx</link>
<description>&lt;STRONG&gt;
&lt;DIV&gt;
&lt;TABLE cellSpacing=0 cellPadding=0 width=487 hspace=&quot;0&quot; vspace=&quot;0&quot;&gt;
&lt;TBODY&gt;
&lt;TR&gt;
&lt;TD vAlign=top&gt;
&lt;P align=center&gt;&lt;B&gt;REMOVAL OF PETROCHEMICALS FROM WATER USING MAGNETIC FILTRATION &lt;/B&gt;&lt;/P&gt;&lt;/TD&gt;&lt;/TR&gt;&lt;/TBODY&gt;&lt;/TABLE&gt;&lt;/DIV&gt;&lt;/STRONG&gt;
&lt;DIV&gt; &lt;/DIV&gt;
&lt;DIV&gt;
&lt;TABLE cellSpacing=0 cellPadding=0 width=56 hspace=&quot;0&quot; vspace=&quot;0&quot;&gt;
&lt;TBODY&gt;
&lt;TR&gt;
&lt;TD vAlign=top&gt;
&lt;P&gt; &lt;/P&gt;&lt;/TD&gt;&lt;/TR&gt;&lt;/TBODY&gt;&lt;/TABLE&gt;&lt;/DIV&gt;
&lt;DIV align=center&gt;&lt;STRONG&gt;introduction&lt;/STRONG&gt;&lt;/DIV&gt;
&lt;DIV&gt; &lt;/DIV&gt;
&lt;P align=left&gt; Magnetic separation has been developed as a recovery and pollution-control process for many environmental and industrial problems including treatment of radioactive water (1) waste water (2)  effluents from steel mills (3), desulfurization of coal (4), separation of mining ores and wastes (5), clay processing (6), purification of drinking water (7), and filtration of cooling water in nuclear reactors (8). Magnetic separation has been used since the nineteenth century but the development of high gradient matrix-type separators has greatly extended the range of applications of &lt;/P&gt;</description>
<pubDate>Sat, 14 Feb 2009 19:34:18 GMT</pubDate>
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<title>مته هاي حفاري </title>
<link>http://petroleum2008.blogfa.com/post-44.aspx</link>
<description>&lt;P dir=rtl&gt;&lt;B&gt;مقدمه : &lt;/B&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl align=justify&gt;مته هاي حفاري كه معمولات به پايين ترين بخش لوله حفاري يا در مورد چاههاي عميق بالاخص سيستم حفاري چرخشي به پايين ترين بخش لوله اضافي متصل بوده و عامل انتقال انرژي دريافتي از لوله حفاري به سنگ مي باشد و از اين طريق موجب نفوذ در آنها مي گردد .بدون شك مقدار انرژي بايد به حدي باشد كه بتواند مقاومت سنگ را در هم بشكند و جنس مته ها نيز بايد از موادي تشكيل شده باشند كه در مقابل سختي سنگها حرارت و فشار اعماق چال يا چاهها مقاومت كنند . با توجه به عملكرد مته هاي حفاري ( شكستن ، و نفوذ در سنگها ) آنها را براساس سه اصل ذيل طراحي مي كنند.&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl align=justify&gt;1-مته هايي كه باعث تراشيدگي و ريز ريز شدن سنگها مي شوند اين گونه مته ها بيشتر براي سنگهاي داراي مقاومت و سفتي كم همچون رسها چسبنده ، شيلهاي رسي و سنگها يا كانيهاي داراي خاصيت ساييدگي مورد استفاده قرار ميگيرند.&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl align=justify&gt;2-مته هايي كه در اثر مماس و با عمل برشي موجب نفوذ در سنگها مي شوند اين نوع مته ها براي سنگهاي نيمه سخت تا سخت و همچنين سنگهايي با خاصيت ساييدگي به كار برده مي شوند .&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl align=justify&gt;3-مته هايي كه با ايجاد بريدگي و خراش اندازي موجب نفوذ در سنگها مي شوند اين  گونه مته ها براي سنگها نيمه سخت تا سخت و سنگهايي با خاصيت پلاستيكي مورد استفاده قرار ميگيرند.&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl align=justify&gt;&lt;B&gt;انواع مته ها &lt;/B&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl align=justify&gt;نوع مته اي كه بايد براي عمليات حفاري انتخاب شود در درجه اول  به نوع سنگي بستگي دارد  كه بايد حفاري گردد .علاوه بر شاخص ذكر شده عامل اقتصادي نيز بايد مورد توجه قرار گيرد . به طور كلي شيلهاي نرم ، سنگهاي جوان رسوبي توسط سيستمهاي حفاري كه مجهز به مته هاي تيغه اي باشند بازدهي مناسبي دارند و مته هايي كه دندان گونه دارند مناسبترين مته براي شيلهاي سخت ، ماسه سنگ و آهك هستند و به دليل سختي الماس نسبت به كانيها و سنگهاي معمولي از نظر اقتصادي از آن براي شرايط بسيار سخت استفاده مي شود.&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt; &lt;/P&gt;</description>
<pubDate>Sat, 14 Feb 2009 19:29:18 GMT</pubDate>
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